बवासीर का सिर्फ 1 अचूक इलाज, जरूर जानें

बवासीर जिसे पाइल्स एवं अर्श रोग भी कहा जाता है, बेहद तकलीफदेह होता है। इस समस्या में रोगी को गंभीर कब्ज तो होता ही है, मलद्वार में असहनीय तकलीफ, कांटों सी चुभन, मस्से एवं घाव, जलन आदि गंभीर समस्याएं हैं, जो रोगी को कमजोर बना देती हैं और मल द्वारा रक्त की भी हानि होती है। ऐसे में इसका सही इलाज ही रोगी को इस समस्या में राहत दे सकता है, अन्यथा तकलीफ बढ़ सकती है।  

कब्ज को मिटा देंगे, ये आसान घरेलू उपाय>  

बवासीर (पाईल्स) कारण बचाव एवं आयुर्वेदिक चिकित्साPiles; causes, prevention and Ayurveda treatments in Hindi

बवासीर की बीमारी जब उग्र रूप धारण कर लेती है, तब उस स्थिति में त्रिफला चूर्ण पेट की बीमारी के लिए अमृतस्वरूप है। पेट (शौच) की समस्याएं जब गंभीर रूप धारण करती हैं, तभी बवासीर की बीमारी होती है, ऐसा सभी जानकारों का कहना है।

समस्या समाधान के लिए रात्रि में सोते समय 3 चम्मच चूर्ण पानी के साथ लेना हितकर है। इससे शीघ्र राहत मिलती है तथा बवासीर की तकलीफ धीरे-धीरे समाप्त हो जाती है। इससे न केवल बवासीर का समाधान होता है बल्कि नेत्र ज्योति पर भी सकारात्मक प्रभाव पड़ता है। 

इसके सेवन के बाद उड़द की दाल, चने की दाल और बैंगन के सेवन से भी तकलीफ महसूस नहीं होती है। रोग निवारण के लिए प्रतिमाह करीब 240 ग्राम त्रिफला चूर्ण का नियमित सेवन आवश्यक है। इससे काफी स्वास्थ्य लाभ होगा।

बवासीर (पाईल्स) कारण बचाव एवं आयुर्वेदिक चिकित्साPiles; causes, prevention and Ayurveda treatments in Hindi

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बवासीर (पाईल्स) कारण बचाव एवं आयुर्वेदिक चिकित्सा
Piles; causes, prevention and Ayurveda treatments in Hindi

बवासीर गुदा (मलद्वार) में होने वाली एक सामान्य बीमारी है, जिसमें मलत्याग के समय रक्तस्राव तथा मस्से फूलने की समस्या होती है. इसे पाईल्स या हेमोराइड्स भी कहते हैं। आयुर्वेद में इसे अर्श कहते हैं। यह बीमारी स्त्रियों की अपेक्षा पुरुषों में कुछ ज्यादा होती है।

बवासीर प्रमुख कारण Piles; causes 

बवासीर (पाईल्स) कारण बचाव एवं आयुर्वेदिक चिकित्साPiles; causes, prevention and Ayurveda treatments in Hindi

बवासीर का प्रमुख कारण पेट की खराबी  व पाचन तन्त्र का कमजोर होना है। इसके अतिरिक्त कारण निम्न हैं ;

  • लम्बे समय तक कब्ज रहना

  • मलत्याग के समय जोर लगाना

  • टॉयलेट में काफी देर तक बैठना

  • हेरिडिटि (वन्शानुगत कारण)

  • अतिसार (दस्त)

बवासीर (पाईल्स) कारण बचाव एवं आयुर्वेदिक चिकित्साPiles; causes, prevention and Ayurveda treatments in Hindi

बवासीर प्रमुख लक्षण Piles; Symptoms

 

 

  • मलत्याग के समय रक्तस्राव – सामान्यतः ताजा रक्त बूंदों या धार के रूप में निकलता है, जो दर्द रहित होता है। परन्तु जब बवासीर के साथ फिशर (गुद्चीर) भी होता है, तो रक्तस्राव के साथ दर्द भी हो सकता है।

  • मलत्याग के समय मस्सों का बाहर निकलना – रोगी जब टॉयलेट में बैठकर जोर लगाता है, तो मस्से बाहर आ जाते हैं व जब जोर हटाता है तो मस्से अन्दर चले जाते हैं। कभी कभी जब बवासीर पुरानी हो जाती है तो मस्सों को अन्दर करने के लिये उंगली का सहारा देना पड्ता है।

  • म्यूकस का निकलना – कभी कभी मस्सों के स्थान पर श्लैष्मिक द्रव का स्राव भी हो सकता है।

 

बवासीर (पाईल्स) कारण बचाव एवं आयुर्वेदिक चिकित्साPiles; causes, prevention and Ayurveda treatments in Hindi

बवासीर बचाव के उपाय Piles; prevention

 Piles treatment at home in Hindi

 

  • भोजन सम्बन्धी आदतों में  बदलाव – रेशेदार सब्जियों, सलाद व फलों का नित्य सेवन करें, तेज मिर्च, मसालों का प्रयोग ना करें। पानी ४-६ लीटर प्रतिदिन पियें। चाय, कॉफी का कम प्रयोग करें। इससे पेट ठीक रहेगा व कब्ज नहीं होगी।

  • मलत्याग के समय ज्यादा जोर ना लगायें।

  • यदि कब्ज हो तो रात में दूध के साथ मुनक्का व १-२ चम्मच इसबगोल की भूसी लें।

  • यदि कोई समस्या हो तो किसी क्वालीफाईड आयुर्वेद फिजीशियन या क्षारसूत्र विशेषज्ञ से मिलकर सलाह अवश्य लें।

 

बवासीर (पाईल्स) कारण बचाव एवं आयुर्वेदिक चिकित्साPiles; causes, prevention and Ayurveda treatments in Hindi

बवासीर आयुर्वेदिक चिकित्सा Piles; Ayurvedic treatments 

 

बवासीर की शुरुआती अवस्था में जब केवल रक्तस्राव होता है तो क्वालीफाईड आयुर्वेद फिजीशियन की सलाह से आयुर्वेदिक औषधियों के प्रयोग द्वारा काफी आराम मिल सकता है तथा बीमारी को आगे बढ्ने से रोका जा सकता है। जब बीमारी ज्यादा बढ जाती है तो क्षारसूत्र चिकित्सा से मस्सों को निकाल दिया जाता है। इससे बीमारी से स्थायी रूप से छुटकारा मिल जाता है। यह विधि सर्जरी की अन्य विधियों की अपेक्षा आसान व अधिक कारगर है।

लेखकः डॉ० NK Vaidhya

Contact : +91-8012345726

बवासीर (पाईल्स) कारण बचाव एवं आयुर्वेदिक चिकित्साPiles; causes, prevention and Ayurveda treatments in Hindi

Piles; causes, prevention and Ayurvedic Treatment

Piles is a disease in which there is prolapse of some mass through anal canal. It is also known as Hemorrhoids. In piles there occur stasis of blood inside the hemorrhoidal blood vessels. This leads to vericosities in these vessels.

Piles Causes

  • Irregular bowel habits

  • Prolonged standing and/or sitting

  • Constipation

  • Straining during defecation

  • Heredity factors

  • Due to other associated diseases like colitis, diarrhoea etc.

बवासीर (पाईल्स) कारण बचाव एवं आयुर्वेदिक चिकित्साPiles; causes, prevention and Ayurveda treatments in Hindi

Piles Symptoms

  • Bleeding during defecation

  • Mass prolapse per anum

  • Sometimes pain when piles associated with fissure or external piles

  • Mucous secretions from piles masses

बवासीर (पाईल्स) कारण बचाव एवं आयुर्वेदिक चिकित्साPiles; causes, prevention and Ayurveda treatments in Hindi

Piles Prevention

  • Avoid straining during defecation

  • Take plenty of fibres in diet like vegetables and fresh fruits to prevent constipation

  • Drink plenty of water (5-6 litres/day)

  • Consult an Ayurveda Physician or specialist if there is bleeding or pain

  • Drink buttermilk daily

बवासीर (पाईल्स) कारण बचाव एवं आयुर्वेदिक चिकित्साPiles; causes, prevention and Ayurveda treatments in Hindi

Ayurvedic Treatment for piles

In Ayurveda there is effective blood controlling and constipation medicines. These should be used by consulting a qualified physician. If prolapse is more (2nd or 3rd degree piles), kshara sutra ligation of piles masses is recommended. It’s a minimally invasive parasurgical procedure employed to cure anorectal diseases like; Piles, Fissure or Fistula in ano etc. in an effective way. Specialists’ consultation is advised before going for kshara sutra therapy.

To know more about kshar sutra therapy for piles

AUTHOR

DR. N  K Vaidhya

 

बवासीर (पाईल्स) कारण बचाव एवं आयुर्वेदिक चिकित्साPiles; causes, prevention and Ayurveda treatments in Hindi

The concept of Health as per Ayurveda, आयुर्वेद मतानुसार स्वास्थ्य

Quacks flourishing in Ayurveda

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बवासीर (पाईल्स) कारण बचाव एवं आयुर्वेदिक चिकित्साPiles; causes, prevention and Ayurveda treatments in Hindi

 
>Piles; causes, prevention and Ayurveda treatments in Hindi

 

Author: Dr. Naveen Chauhan, BAMS, CCYP, ROTP, CRAV (KSHARA SUTRA)

SURGEON CUM AYURVEDA PHYSICIAN

SPECIALIST IN FISTULA in ANO, PILES, FISSURE, PILONIDAL SINUS, ANO-RECTAL ABSCESSES

AROUND 10 YEARS OF CLINICAL EXPERIENCE IN AYURVEDA SURGICAL PROCEDURES

 

बवासीर गुदा (मलद्वार) में होने वाली एक सामान्य बीमारी है, जिसमें मलत्याग के समय रक्तस्राव तथा मस्से फूलने की समस्या होती है. इसे पाईल्स या हेमोराइड्स भी कहते हैं। आयुर्वेद में इसे अर्श कहते हैं। यह बीमारी स्त्रियों की अपेक्षा पुरुषों में कुछ ज्यादा होती है।

बवासीर प्रमुख कारण Piles; causes

बवासीर का प्रमुख कारण पेट की खराबी व पाचन तन्त्र का कमजोर होना है। इसके अतिरिक्त कारण निम्न हैं ;

 

बवासीर प्रमुख लक्षण Piles; Symptoms

 

 

 

 

बवासीर बचाव के उपाय Piles; prevention

Piles treatment at home in Hindi

 

 

बवासीर आयुर्वेदिक चिकित्सा Piles; Ayurvedic treatments

 

बवासीर की शुरुआती अवस्था में जब केवल रक्तस्राव होता है तो क्वालीफाईड आयुर्वेद फिजीशियन की सलाह से आयुर्वेदिक औषधियों के प्रयोग द्वारा काफी आराम मिल सकता है तथा बीमारी को आगे बढ्ने से रोका जा सकता है। जब बीमारी ज्यादा बढ जाती है तो क्षारसूत्र चिकित्सा से मस्सों को निकाल दिया जाता है। इससे बीमारी से स्थायी रूप से छुटकारा मिल जाता है। यह विधि सर्जरी की अन्य विधियों की अपेक्षा आसान व अधिक कारगर है।

लेखकः डॉ० नवीन चौहान

आयुर्वेद फिजीशियन व क्षारसूत्र विशेषज्ञ